परिचय:
यहीं पर उन आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) मशीनों के बीच अंतर किया जाता है जो पहले ही बनाई जा चुकी हैं और उन AI मशीनों के बीच जो भविष्य में बनाई जाएँगी। हालाँकि थ्योरी ऑफ़ माइंड (ToM) उपकरण अभी हक़ीक़त नहीं बने हैं, वैज्ञानिक इस तकनीक को साकार करने के लिए काम कर रहे हैं।
थ्योरी ऑफ़ माइंड क्या है?
'थ्योरी ऑफ़ माइंड' शब्द मनोविज्ञान से लिया गया है, और अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) ने इसे इस प्रकार परिभाषित किया है:
थ्योरी ऑफ़ माइंड के अनुसार, "यह जागरूकता कि दूसरों के लक्ष्य, इच्छाएँ, विश्वास, धारणाएँ और भावनाएँ अपनी से भिन्न होती हैं, लेकिन ऐसे इरादे, इच्छाएँ आदि लोगों के व्यवहार और कार्यों को प्रभावित करते हैं।"
थ्योरी ऑफ़ माइंड कैसे काम करती है?
इस प्रकार के रोबोट डेटा को संभालते समय सामान्य समझ का उपयोग करने और रीयल-टाइम में संभव निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं। यह बिल्ड डेटा का विश्लेषण करने के साथ-साथ अधिक लाभ के लिए अभिलेखागार के काम भी आता है।
इस प्रकार का रोबोट सीढ़ियों और विपरीत दिशा से आने वाली अन्य चीज़ों को भांप सकता है। बाधाओं को समझकर यह रोबोट नीचे उतरने का सुरक्षित रास्ता तैयार करने में सक्षम होता है।
थ्योरी ऑफ़ माइंड का उदाहरण क्या है?
Kismet माइंड के विचार पर आधारित AI का एक व्यावहारिक उदाहरण है। Kismet एक रोबोट हेड है जिसे 1990 के दशक के अंत में Massachusetts Institute of Technology के एक शोधकर्ता ने बनाया था। Kismet मानवीय भावनाओं की नकल कर सकता है और उन्हें पहचान सकता है। हालाँकि दोनों क्षमताएँ थ्योरी ऑफ़ माइंड AI में महत्वपूर्ण प्रगति हैं, फिर भी Kismet मानवीय निगाहों को ट्रैक करने या लोगों की ओर ध्यान स्थानांतरित करने में असमर्थ है।
थ्योरी ऑफ़ माइंड AI के क्रियान्वयन का एक और उदाहरण Hanson Robotics की Sophia है। Sophia अपनी आँखों में लगे कैमरों और कंप्यूटर एल्गोरिदम की बदौलत देख सकती है। वह आँखों से संपर्क बनाए रख सकती है, लोगों को पहचान सकती है और चेहरों का अनुसरण कर सकती है।
थ्योरी ऑफ़ माइंड की कुछ विशेषताएँ क्या हैं?
- माइंड-बॉडी थ्योरी AI को मानवीय भावनाओं, व्यक्तित्वों और विश्वासों को समझने के साथ-साथ सामाजिक रूप से संवाद करने में सक्षम होना चाहिए।
- इस प्रकार का AI कंप्यूटर अभी तक बना नहीं है, फिर भी शोधकर्ता ऐसी AI मशीनों को बेहतर बनाने और बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
- यह कम उदाहरणों से सीख सकती है क्योंकि यह उद्देश्यों और इरादे को समझती है।[1]
निष्कर्ष:
हो सकता है हम ऐसी आत्म-जागरूक मशीनें बनाने से अभी बहुत दूर हों जो सभी समस्याएँ हल कर दें। फिर भी हमें अपना ध्यान यह समझने पर लगाना चाहिए कि कंप्यूटर खुद कैसे प्रशिक्षित हो सकता है, सीख सकता है और पिछले अनुभवों के आधार पर निर्णय ले सकता है।
- Types of Artificial Intelligence:. यहाँ उपलब्ध: https://www.javatpoint.com/types-of-artificial-intelligence.
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